🌍भारत की हवा खतरे के निशान पर
13 नवम्बर 2025
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 शहर भारत में हैं।
दिल्ली, गाज़ियाबाद, नोएडा, पटना, लखनऊ, कानपुर और मुंबई जैसे बड़े शहरों में हवा की गुणवत्ता लगातार “खराब” से “गंभीर” श्रेणी में बनी हुई है। भारत की हवा खतरे के निशान पर या यूँ कहें खतरे के निशान से ऊपर निकल चुकी है ।
📈 औसत AQI स्तर
देश का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) आज 312 दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है।
कई शहरों में स्थिति इससे भी अधिक गंभीर है:
- दिल्ली: AQI 450
- गाज़ियाबाद: AQI 430
- लखनऊ: AQI 390
- मुंबई: AQI 310
- कोलकाता: AQI 305
- पटना: AQI 370
🌾 प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण के मुख्य कारण हैं —
- पराली जलाना
- डीज़ल वाहनों और पुराने ट्रकों से उत्सर्जन
- निर्माण कार्य से निकलने वाली धूल
- कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र
- घरेलू स्तर पर ठोस ईंधन (कोयला, लकड़ी) का उपयोग
सर्दियों के मौसम में इन सभी कारकों का प्रभाव बढ़ जाता है, क्योंकि हवा की गति कम होने से प्रदूषक कण वातावरण में फंस जाते हैं।
🚸 स्वास्थ्य पर असर
डॉक्टरों का कहना है कि वायु प्रदूषण के कारण सांस, फेफड़ों और हृदय रोगों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है।
AIIMS और अन्य प्रमुख अस्पतालों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में तकलीफ के मरीजों की संख्या में 30% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
🧠 विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को तत्काल दीर्घकालिक नीति अपनाने की ज़रूरत है।
“सिर्फ आपातकालीन कदम काफी नहीं हैं। हमें स्वच्छ ऊर्जा, हरित परिवहन और शहरी योजना पर ध्यान देना होगा।”
— डॉ. अनिल अग्रवाल, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट
🏛️ सरकार की कार्रवाई
केंद्र सरकार ने “नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP)” के तहत 131 शहरों में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए अभियान चलाया है।
लक्ष्य है — वर्ष 2026 तक प्रदूषण स्तर में 40% की कमी लाना।
राज्य सरकारों को भी “ग्रैप प्लान” के तहत निर्माण कार्य और वाहनों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
🌦️ आगे का पूर्वानुमान
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर भारत में अगले दो दिनों में ठंडी हवाओं के सक्रिय होने से हल्की राहत मिल सकती है।
हालांकि दक्षिण और मध्य भारत में प्रदूषण स्तर स्थिर बना रहेगा।
🕊️ समाधान की दिशा में
विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि:
- निजी वाहन के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें,
- पेड़ लगाएँ और अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें,
- और मास्क पहनने व इनडोर एयर प्यूरीफायर के प्रयोग पर ध्यान दें।
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